भारत निश्चित रूप से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा: अश्विनी वैष्णव
दावोस, केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने
बुधवार को कहा कि भारत आने वाले कुछ वर्ष में निश्चित रूप से दुनिया की
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वहीं, अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ
ने कहा कि यह साल 2028 या उससे भी पहले संभव है।
स्विट्जरलैंड के
दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) 2026 की वार्षिक बैठक के एक
सत्र में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भरोसा जताया कि
भारत अगले कुछ वर्षों में निश्चित रूप से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी
अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसी चर्चा में शामिल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
(आईएमएफ) की प्रथम उप-प्रबंध निदेशक अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी इससे
सहमति जताते हुए कहा कि भारत साल 2028 या उससे भी पहले इस मुकाम को हासिल
कर सकता है।
वैष्णव ने इस चर्चा के दौरान कहा कि इस वक्त भारत के
लिए चिंता की एकमात्र वजह अमीर देशों पर कर्ज का बढ़ता बोझ है। उन्होंने
आशंका जताई कि अगर विकसित देशों में कर्ज का यह संकट गहराता है, तो इसका
भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसे लेकर सतर्क रहने की
जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक ऋण संकट पर चिंता जाहिर करते हुए
जापान का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर विकसित देशों में बांड मार्केट
या ऋण को लेकर बड़े पैमाने पर उथल-पुथल होती है, तो हमें यह देखना होगा कि
हमारी अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा। हालांकि, फिलहाल भारत की स्थिति
काफी मजबूत है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों
में 6 से 8 फीसदी की रियल ग्रोथ दर्ज करेगा। इस दौरान मुद्रास्फीति 2 से 4
फीसदी के बीच मध्यम रहेगी। उन्होंने बताया कि नॉमिनल ग्रोथ 10 से 13 फीसदी
तक रहने का अनुमान है, जिससे समाज के हर तबके को फायदा होगा। वैष्णव ने
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सरकार की
प्राथमिकता सबसे गरीब व्यक्ति की सुरक्षा है।
वहीं, आईएमएफ की
प्रथम उप-प्रबंध निदेशक अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत के लिए
तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है।
उन्होंने कहा कि असली चुनौती देश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना है, ताकि आम
नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आ सके। गीता गोपीनाथ ने विकास दर के गणित
का हवाला देते हुए कहा कि जर्मनी और जापान की तुलना में भारत की आर्थिक
वृद्धि दर की रफ्तार काफी तेज है। उन्होंने कहा कि मौजूदा अनुमानों के
हिसाब से साल 2028 तक भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। अगर
जीडीपी के आंकड़े अनुकूल रहे तो यह उपलब्धि उससे पहले भी हासिल हो सकती है।

