एआई की ताकत मॉडल के आकार से नहीं बल्कि व्यावहारिक उपयोग और उत्पादकता से: वैष्णव


नई दिल्ली,   केद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई में निवेश पर लाभ केवल बड़े मॉडल बनाने से नहीं बल्कि उनके व्यावहारिक उपयोग और उत्पादकता से आता है। उनके अनुसार लगभग 95 प्रतिशत एआई उपयोग मामलों को 20 से 50 अरब पैरामीटर वाले मॉडल से हल किया जा सकता है। यह भारत के पास पहले से उपलब्ध हैं और विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दावोस में विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। “एआई पावर प्ले, नो रेफरीज” विषय पर हुई इस चर्चा में उन्होंने एआई के व्यापक उपयोग, उसकी आर्थिक व्यवहार्यता और तकनीकी-कानूनी शासन पर जोर दिया।

वैश्विक एआई गठबंधनों और भू-राजनीति से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने कहा कि भारत एआई विकसित देशों के अग्रणी समूह में शामिल है। उन्होंने बताया कि एआई ढांचे के पांच प्रमुख स्तर होते हैं एप्लिकेशन, मॉडल, चिप, अवसंरचना और ऊर्जा। भारत इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि एप्लिकेशन स्तर पर भारत विश्व का सबसे बड़ा सेवा प्रदाता बन सकता है।

भू-राजनीति में एआई की भूमिका पर बोलते हुए उन्होंने बहुत बड़े मॉडलों के स्वामित्व को शक्ति का एकमात्र मापदंड मानने से सावधान किया। उन्होंने कहा कि प्रभावी एआई तैनाती कम लागत, छोटे मॉडल, तेज सीपीयू और कस्टम सिलिकॉन पर आधारित होगी, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी।

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि जीपीयू की कमी को दूर करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत 38 हजार जीपीयू की साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा विकसित की गई है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने एआई नियमन के लिए तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा कि डीपफेक और पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत तकनीकी समाधान आवश्यक हैं। इस पैनल चर्चा का संचालन यूरेशिया ग्रुप के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने किया, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट, आईएमएफ और सऊदी अरब के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।