उधमपुर की डेयरी उत्पाद ‘कलाड़ी’ को मिलेगी नई पहचान, आधुनिक खाद्य तकनीक से बढ़ाया जाएगा आगे
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दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की पारंपरिक डेयरी
उत्पाद कलाड़ी को आधुनिक खाद्य तकनीक की मदद से आगे बढ़ाया जाएगा। कलाड़ी
को हाल ही में जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिला है और इसे सरकार की
एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत चुना गया है।
इस संबंध में
कर्तव्य भवन में बुधवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी
विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबंधित
अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि
जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की पारंपरिक डेयरी उत्पाद कलाड़ी को आधुनिक
खाद्य तकनीक की मदद से आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि कलाड़ी का
स्वाद, बनावट और पोषण बिल्कुल वैसे ही बनाए रखते हुए इसे नए-नए खाद्य रूपों
और व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाए। इससे स्थानीय किसानों और कारीगरों की
आमदनी बढ़ने की संभावना है। लेकिन कलाड़ी की सबसे बड़ी समस्या इसकी कम
शेल्फ लाइफ है। यह कुछ ही दिनों में खराब हो जाती है, खासकर अगर इसे ठंडे
तापमान में न रखा जाए। इसी वजह से इसे दूर-दराज के बाजारों तक पहुंचाना
मुश्किल होता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से कहा कि
वैज्ञानिक तरीके से इसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि इसे देश और
विदेश के बाजारों में भेजा जा सके। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की
तकनीक अपनाते समय यह ध्यान रखा जाए कि कलाड़ी का पारंपरिक स्वाद, दूधिया
खुशबू और खिंचने वाली बनावट खराब न हो। कलाड़ी को अक्सर “जम्मू की मोज़रेला
चीज़” भी कहा जाता है, इसलिए इसकी पहचान बनी रहनी चाहिए।
इस काम के
लिए सीएसआईआर की दो प्रमुख संस्थाओं—मैसूरु स्थित सीएफटीआरआई और जम्मू
स्थित आईआईआईएम को साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। ये संस्थान
कलाड़ी के पोषण तत्वों की जांच, स्वाद की पुष्टि, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और
पैकेजिंग पर काम करेंगे। शुरुआती रिपोर्ट कुछ हफ्तों में और पूरी परियोजना
छह महीने में पूरी होने की उम्मीद है।
उल्लेखनीय है कि कलाड़ी
आमतौर पर कच्चे फुल-फैट दूध से बनाई जाती है और इसमें मट्ठे के पानी का
इस्तेमाल होता है। कलाड़ी को अक्सर “जम्मू की मोज़रेला चीज़” भी कहा जाता
है,जीआई टैग मिलने के बाद इसकी मांग बढ़ी है, जिससे ग्रामीण युवाओं को
रोजगार भी मिला है।

