डब्ल्यूईएफ दावोस में ट्रंप का आक्रामक संबोधन: ग्रीनलैंड पर दावा, चीन-यूरोप की नीतियों पर तीखे तंज
दावोस, । स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम
(डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार
फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी। अपने संबोधन
में ट्रंप ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था, वैश्विक भूमिका और सुरक्षा नीति पर
खुलकर बात की, लेकिन सबसे अधिक चर्चा ग्रीनलैंड को लेकर उनके दावे और
यूरोप-चीन पर किए गए तीखे हमलों की रही।
ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड
वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम रणनीतिक क्षेत्र है और इसकी सुरक्षा
केवल अमेरिका ही कर सकता है। उन्होंने इस मुद्दे पर “तुरंत बातचीत” की
जरूरत बताते हुए कहा कि यह अमेरिका की कोई असामान्य मांग नहीं बल्कि
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने डेनमार्क
पर ग्रीनलैंड में पर्याप्त निवेश न करने का आरोप लगाया, हालांकि यह भी
स्पष्ट किया कि वह इस मामले में बल प्रयोग नहीं करना चाहते और शांतिपूर्ण
समाधान के पक्षधर हैं।
ग्रीन एनर्जी के मुद्दे पर ट्रंप ने यूरोप और
चीन दोनों को निशाने पर लिया। उन्होंने यूरोप की नीतियों को “ग्रीन न्यू
स्कैम” बताते हुए कहा कि इन फैसलों की वजह से कई यूरोपीय देश ऊर्जा संकट की
ओर बढ़ गए हैं, जबकि अमेरिका इससे बचा रहा। ट्रंप ने जर्मनी और ब्रिटेन का
उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां ऊर्जा उत्पादन घटा है और प्राकृतिक
संसाधनों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा। पवन ऊर्जा परियोजनाओं पर कटाक्ष
करते हुए उन्होंने विंडमिल्स को “बेकार” करार दिया।
चीन पर निशाना
साधते हुए ट्रंप ने कहा कि वह ग्रीन टेक्नोलॉजी के नाम पर दुनिया को गुमराह
कर रहा है। वहीं, यूरोप को लेकर उन्होंने चिंता जताई कि माइग्रेशन और
ऊर्जा नीतियों ने उसे कमजोर किया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि
अमेरिका यूरोप को एक मजबूत सहयोगी के रूप में देखना चाहता है।
यूक्रेन
युद्ध पर बोलते हुए ट्रंप ने इसे “भीषण रक्तपात” बताया और कहा कि वह रूस
और यूक्रेन दोनों पक्षों से बातचीत कर इस संघर्ष को समाप्त करना चाहते हैं।
उल्लेखनीय
है कि डब्ल्यूईएफ 2026 की बैठक 19 जनवरी से शुरू हुई है, जो पांच दिन तक
चलेगी। इसमें 130 देशों के करीब 3,000 वैश्विक नेता, उद्योग प्रमुख और नीति
विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। ट्रंप के बयानों ने इस मंच से एक बार फिर
ऊर्जा नीति, वैश्विक सुरक्षा और अमेरिका-यूरोप संबंधों पर नई बहस छेड़ दी
है।

