नेहरू काल में ‘कल्याण’ ने भारतीय संस्कृति की राह दिखाई: अमित शाह
देहरादून, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि
1950 में, जब नेहरू के नेतृत्व में पाश्चात्य प्रभाव वाली नीतियां बन रही
थीं, तब कल्याण के ‘हिंदू अंक’ के प्रकाशन से गीता प्रेस ने देश को वैचारिक
दिशा दी। प्रकाशन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को देश की
वैचारिक दिशा में शामिल करना था।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने
बुधवार को उत्तराखंड के ऋषिकेश में गीता प्रेस की ओर से प्रकाशित मासिक
पत्र ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने
लक्ष्मीनारायण मंदिर और मां गंगा के दर्शन एवं पूजन भी किए। समारोह में
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद
रहे।
अमित शाह ने कहा कि जब देश स्वतंत्र होकर नीतियां बना रहा
था,तब गीता प्रेस ने विदेशी प्रभाव के बजाय भारतीय विचारों को आधार बनाया।
पत्रिका ने कभी आक्रामक भाषा का प्रयोग नहीं किया और इसका मुख्य उद्देश्य
लोककल्याण और विश्व कल्याण था।
गीता प्रेस ने कभी प्रचार या धन
कमाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। ‘कल्याण’ ने यह सिद्ध कर दिया कि
सभ्यताएं तलवार से नहीं बल्कि शब्द और ज्ञान से ही खड़ी होती हैं। उन्होंने
महात्मा गांधी के उस निर्देश का स्मरण किया कि कल्याण में कभी विज्ञापन
प्रकाशित न किए जाएं और आज तक पत्रिका ने किसी भी प्रकार का विज्ञापन नहीं
छापा।
अमित शाह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद कल्याण का पहला
प्रकाशित होने वाला अंक नारी अंक था। उन्होंने कहा कि कल्याण का हिंदू
संस्कृति अंक उस समय आया जब 1950 में पाश्चात्य असर से हमारे देश की
नीतियां गढ़ी जा रही थीं। इस अंक के पीछे विचार रहा होगा कि जब देश आज़ाद
होकर अपनी नीतियां बना रहा है तब उनके मूल में हमारी भारतीय संस्कृति के
विचार समाहित होने चाहिए न कि विदेशी विचार होने चाहिए।
उन्होंने
कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक मूल्यों को
नीतियों के मूल में समाहित करने की प्रक्रिया की सराहना की। उन्होंने
उल्लेख किया कि रामलला का मंदिर अयोध्या में 550 साल बाद बन चुका है,काशी
विश्वनाथ और महाकालेश्वर के कॉरिडोर का निर्माण हुआ है, केदारनाथ और
बद्रीधाम का पुनर्निर्माण पूरा हो चुका है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा
कि गीता प्रेस ने संतों के अहर्निश प्रयासों और अनेक धार्मिक ग्रंथों को
प्रकाशित कर राष्ट्र में चेतना और जागृति पैदा की। इसके परिणामस्वरूप आज
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में विश्वास और आकर्षण बढ़ा है।
कल्याण
ने अब तक सनातन समर्पित 100 विशेषांक प्रकाशित किए हैं। उन्होंने कहा कि
1932 के अंक में श्री कृष्ण को श्रद्धा की दृष्टि से, राजनीतिज्ञ,
तत्वज्ञानी और सभी दुष्टों का दमन करने वाले महापुरुष के रूप में एक ही अंक
में कल्याण ने लोगों के सामने रखने का काम किया है। उन्होंने कहा कि
कल्याण ने योग अंक 1936 में प्रकाशित किया था, जिसमें योग की व्याख्या,
स्वरूप और प्रणालियों पर विस्तार से प्रकाश डालने का काम किया गया था।
उन्होंने
यह भी बताया कि देशभर में 35 से अधिक तीर्थों की पुनर्जागृति हो रही है और
मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा मिला है। साथ ही भारत से चोरी हुई 642 से
अधिक मूर्तियों को वापस उनके मूल स्थान पर पुनर्स्थापित किया गया है।
अमित
शाह ने कहा कि गीता प्रेस का उद्देश्य व्यक्ति-केंद्रित नहीं बल्कि
विचार-केंद्रित है और इसके माध्यम से चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का
मार्ग प्रशस्त किया गया है।
इस मौके पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री
पुष्कर सिंह धामी ने गीता प्रेस की मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के शताब्दी अंक
को सनातन संस्कृति, राष्ट्र चेतना और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की ऐतिहासिक
साधना करार दिया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय जयदयाल गोयन्दका और हनुमान
प्रसाद पोद्दार द्वारा स्थापित गीता प्रेस की परंपरा आज भी देश को उसकी
सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत को आत्मनिर्भर राष्ट्र
बनाने और सांस्कृतिक विरासत को सशक्त करने के प्रयासों की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गीता प्रेस ने अब तक 101 करोड़ से अधिक धार्मिक ग्रंथों का प्रकाशन कर भारतीय चेतना को जागृत रखा है।
कल्याण
पत्रिका के संपादक कृष्ण कुमार खेमका ने कहा कि अब तक पत्रिका की लगभग 17
करोड़ 50 लाख प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं,जो इसके व्यापक जनविश्वास और
सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाती हैं।
इस अवसर पर गढ़वाल सांसद अनिल
बलूनी, हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह
रावत, कृषि मंत्री गणेश जोशी, वन मंत्री सुबोध उनियाल, परमार्थ निकेतन के
अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, पूज्य द्वाराचार्य स्वामी
राजेन्द्रदास जी महाराज, केशोराम जी अग्रवाल,आचार्य स्वामी गोविन्ददेव गिरि
जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरी जी महाराज,
गोविंदानंदजी तीर्थ जी महाराज, विधायक यमकेश्वर रेनू बिष्ट, ऋषिकेश
प्रेमचंद्र अग्रवाल, विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ,
प्रमुख सचिव गृह शैलेश बगोली, जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस.भदौरिया, वरिष्ठ
पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी गिरीश
गुणवंत सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि, धर्म, संस्कृति एवं साहित्य जगत से
जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

